संयुक्त राष्ट्र की नेतृत्व में क्लाइमेट एंड क्लीन एयर कोएलिशन (जलवायु और स्वच्छ वायु गठबंधन) द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट...
संयुक्त राष्ट्र की जलवायु मामलों की संस्था UNFCCC की ताज़ा रिपोर्ट निराश करने वाली है। इस रिपोर्ट की मानें तो...
इस वक़्त अगर आप इस ख़बर को पढ़ रहे हैं तो मतलब आपके पास बिजली की सप्लाई है। और इस...
भारत में लंबी अवधि के औसत (LPA) (एलपीए) के 99% की सामान्य वर्षा दर्ज की जाने के साथ, चार महीने...
राष्ट्रीय स्तर की वायु गुणवत्ता मॉनिटरिंग और शहर के एक्शन प्लान साबित हुए हैं अप्रभावी, राज्यों के एक्शन प्लान नहीं...
यूरोप के तमाम विकसित देश अक्सर भारत जैसे विकासशील देशों पर अधिक कार्बन एमिशन (carbon emission) का आरोप लगाते हैं और उम्मीद करते हैं कि वो अपना एमिशन सतत गति से कम करें और एनेर्जी ट्रांज़िशन (energy transition) की सोचें, लेकिन आज हालात ऐसे बन गए हैं कि यूरोप ख़ुद एक ऊर्जा संकट (energy crisis) की मझधार में फंसा दिख रहा है।
क्लाइमेट सेंट्रल के इस विश्लेषण की मानें तो 14-16 जून, 2023 के बीच पूरे उत्तर प्रदेश में चलने वाली तीन दिन रही मारक हीटवेव (Heat Wave) की संभावना जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के कारण कम से कम दो गुना अधिक पाई गई।
ग्लासगो में अगले महीने आयोजित होने वाली सीओपी26 और दिसम्बर में इटली की मेजबानी में होने जा रही जी20 शिखर...
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है और तेज आर्थिक विकास की बदौलत आने वाले दशकों में इसकी ऊर्जा मांग चौगुनी हो जाएगी।
उत्सर्जन में कटौती के बिना, ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करना पहुंच से बाहर है। इस काम के लिए ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव की आवश्यकता है और जीवाश्म ईंधन के उपयोग में भारी कमी लानी होगी ।
बारिश की आमद गर्मी से राहत देने के लिए जानी जाती थी। मगर अब, यह राहत बन रही है आफत। भारत में चरम मौसम की घटनाओं में वृद्धि का पैमाना हर गुजरते साल के साथ नई ऊंचाई छू रहा है।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की एक नई रिपोर्ट में, ग्लासगो में जलवायु वार्ता के लिए इकट्ठा हुए राष्ट्राध्यक्षों द्वारा,...


