बेंगलुरु में हाल ही में हुई भीषण वर्षा के बाद हुई जल भराव की खबरों ने दुनिया भर में सुर्खियां बटोरी। तमाम लोगों को अपना घर छोड़ कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा और इंटरनेट पर इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े तमाम मीम्स और मज़ाक़ वायरल होते रहे। स्थिति वाकई कई मायनों में हास्यास्पद थी, मगर यह एक चिंता का भी विषय है। आखिर भारत के इस आईटी हब ने इस बाढ़ की वजह से कथित तौर पर 225 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान दर्ज किया।
इस बात में दो राय नहीं कि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस एमिशन (Greenhouse Gas Emissions) में वृद्धि हुई है, लेकिन पिछले दशक के औसत के मुक़ाबले यह बहुत कम मात्रा में हुआ है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का तो मानना है कि रिन्यूबल बिजली उत्पादन और इलेक्ट्रिक वाहनों के तेजी से बढ़ते चलन ने एमिशन की इस वृद्धि के पैमाने को संभवत दो-तिहाई तक कम कर दिया है।
ऊर्जा क्षेत्र की देश की अग्रिणी सार्वजनिक गैर बैंकिंग वित्तीय कम्पनियां (NBFC) पीएफसी और आरईसी नई प्रौद्योगिकियों (पवन बिजली सौर ऊर्जा बैटरी स्टोरेज और इलेक्ट्रिक वाहन आदि) के हिसाब से खुद को पर्याप्त रूप से बदल नहीं पाई हैं जिसके चलते इनके विकास और मुनाफ़ा कमाने की दर ठहरी हुई है।
सुबह की कॉफी अब सिर्फ स्वाद नहीं, तापमान की कहानी है। 30 डिग्री सेल्सियस। यही वह सीमा है जहां से कॉफी पौधों पर हीट स्ट्रेस शुरू होता है।
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की वैश्विक लड़ाई में स्थानीय कार्यवाही की प्रासंगिकता को लगातार सिद्ध करने के लिए भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग को वैश्विक पटल पर अपने नवाचारों को पूरी दुनिया के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष प्रस्तुत करने का एक मौका देना का फैसला किया है।
मानसून का जल्दी आना और बारिश के पैटर्न में बदलाव, इस वर्ष बार-बार आने वाली अचानक बाढ़ की वजह समझने में मदद कर सकता है। पड़ोसी देश बांग्लादेश में तो अप्रैल के पहले सप्ताह में ही बाढ़ आ गयी जो की मार्च में हुई भारी बारिश का नतीजा थी। विशेषज्ञों ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और मानसून की जल्दी आमद के बीच एक मजबूत संबंध है जिसके कारण अचानक बाढ़ आई है।
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से गंभीर प्रभावों से बचने के लिए दुनिया को कोयले के जलने से होने वाले कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने के लिए तेजी से आगे आना चाहिए। ऐसा कुछ करने के लिए ज़रूरी है कि कोयले के स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों के लिए बड़े पैमाने पर वित्तपोषण को तेजी से बढ़ाया जाए और तत्काल नीति कार्रवाई सुनिश्चित कि जाए।
भारत की मेजबानी में इस साल गोवा में चौथी G20 एनर्जी ट्रांज़िशन वर्किंग ग्रुप (ETWG) की बैठक आयोजित की गयी। उम्मीद थी कि इस बैठक के नतीजे दुनिया को प्रदूषण मुक्त ऊर्जा व्यवस्था की ओर बढ्ने में मदद करेंगे।
दुनिया भर में कुल बिजली उत्पादन में विंड और सोलर का हिस्सा दस फीसद से ज़्यादा, 2015 के बाद से हुआ दोगुना
Climate Change: दुनिया के हर कोने में न सिर्फ़ जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के प्रभावों को महसूस किया जा रहा...
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भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े 3000 से ज्यादा पेशेवर लोगों को शामिल कर जलवायु परिवर्तन पर किये गये अब...



