एक नई रिपोर्ट से पता चलता है कि जहां एक ओर भारत और नेपाल में दुनिया भर में वायु प्रदूषण (Air Pollution) के सबसे खराब प्रदूषण से जूझ रहे हैं, वहीं इन देशों की इस समस्या से निपटने में मदद करने के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं से बेहद कम आर्थिक सहयोग मिलता है।
क्लाइमेट सेंट्रल के इस विश्लेषण की मानें तो 14-16 जून, 2023 के बीच पूरे उत्तर प्रदेश में चलने वाली तीन दिन रही मारक हीटवेव (Heat Wave) की संभावना जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के कारण कम से कम दो गुना अधिक पाई गई।
जलवायु परिवर्तन भारत और अन्य विकासशील देशों के लिए कितना घातक साबित हो सकता है उसका अंदाज़ा इसी से लगाया...
आप के योगदान से भारत अगले बीस सालों में दुनिया के किसी भी देश के मुक़ाबले बिजली की मांग में...
बात अगर पेरिस समझौते के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस या 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे सीमित करने...
वैश्विक कार्बन उत्सर्जन का स्तर कोविड-पूर्व के स्तरों के नज़दीक पहुंच चुका है, यह कहना है ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट द्वारा...
जलवायु परिवर्तन के खिलाफ कार्रवाई के प्रति अमेरिका एक बार फिर संजीदा है। यही वजह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो...
इस ताज़ा रिपोर्ट की मानें तो भारत के रिन्यूएबल एनेर्जी और ग्रिड प्रोजेक्ट्स में निवेश करने के लिए ग्लोबल निवेशकों...
भारत का प्रवेश द्वार कहा जाने वाला राज्य महाराष्ट्र भारत के सबसे बड़े वाणिज्यिक और औद्योगिक केंद्रों में से एक...
कार्बन उत्सर्जन में कटौती के बिना, आने वाले निकट भविष्य में गर्मी और उमस मानव सहनशीलता की सीमा को पार कर जाएगी।
भले ही तमाम देश कार्बन उत्सर्जन में कटौती का दम भर रहे हैं , लेकिन असलियत ये है कि उनकी...
आज से ठीक एक साल पहले, 23 जनवरी 2020 को, चीन ने जब वुहान शहर में तालाबंदी लागू की थी,...

