दुनिया में अपनी तरह के इस पहले विश्लेषण में विश्व भर के हर राज्य और प्रान्त की जलवायु का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है। इस रिपोर्ट में पाया गया है कि भारत के नौ राज्य जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के आठ नुकसानदेह प्रभावों से होने वाली क्षति के सबसे गम्भीर खतरे वाले दुनिया के टॉप 50 क्षेत्रों की सूची में शामिल हैं।
आईपीसीसी की ताजा रिपोर्ट इस बात की गवाही देती है कि दुनिया प्रदूषण उत्सर्जन न्यूनीकरण के लक्ष्यों को हासिल कर पाने की राह पर नहीं है। इस मार्ग पर आगे बढ़ने के लिये जरूरी है कि प्रयासों को दोगुना किया जाए और नुकसान को जहां तक हो सके, कम किया जाए।
भारत साल 2030 तक अपनी गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता (non-fossil power potential) को 500 गीगावाट (GW) तक पहुंचाएगा और इस लक्ष्य का आधा रिन्यूबल ऊर्जा (renewable energy) से हासिल किया जाएगा। साथ ही, उत्सर्जन में एक बिलियन टन की कमी और 2030 तक सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता में 45% की कमी कि भी घोषणा मोदी जी ने की है।
वर्षों से, श्रीलंका अपनी गैर-समावेशी विचारधारा के कारण गहरे संकट में चला गया है। बेहतर है कि भारत समय से अपना सबक सीख ले।
हिमाचल प्रदेश में बारिश और उसके बाद हुए भूस्खलन में कम से कम 75 लोगों की जान जाने के बाद वहाँ की सरकार ने वहाँ राज्य स्तरीय आपदा घोषित कर दी। उत्तराखंड में भी हाल कुछ मिलता जुलता ही है।
जलवायु प्रतिबद्धताओं के बावजूद, सार्वजनिक संस्थान प्राकृतिक गैस के लिए, पवन या सौर के मुक़ाबले, चार गुना ज़्यादा फंड प्रदान...
इस वक़्त अगर आप इस ख़बर को पढ़ रहे हैं तो मतलब आपके पास बिजली की सप्लाई है। और इस...
औद्योगिक और आर्थिंक रूप से देश के सबसे महत्वपूर्ण राज्य महाराष्ट्र के 18 नॉन अटेनमेंट शहरों के लिये प्रदूषण से...
क्या हाइड्रोजन वाकई गेम चेंजर बन सकता है, जैसा कि कुछ का मानना है? इन सवालों के जवाब के लिए कुछ बातों को समझना और उन पर गौर करना ज़रूरी है।
आज प्रकाशित एक ताज़ा शोध से पता चलता है कि फेसबुक पर फॉसिल फ्युएल से जुड़े विज्ञापनों को ऐसे दिखाया...
आप जब यह रिपोर्ट पढ़ रहे हैं, उस वक़्त दुनिया भर के कोयला उत्पादक सक्रिय रूप से 2.2 बिलियन टन...
कोरबा देश के 16% से अधिक कोयले का उत्पादन करता है। यह बिजली उत्पादन का केंद्र भी है, जिसकी थर्मल पावर क्षमता 6,428 मेगावाट है।



