इस नए शोध की मानें तो जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और भीषण गर्मी आपके बच्चे का बुढ़ापा खराब कर सकती है।
एनर्जी ट्रांज़िशन (energy transition) में तेजी लाने और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से मुकाबला करने के लिए पिछले हफ्ते जी20 देशों के नेताओं ने वर्ष 2030 तक वैश्विक रिन्युब्ल एनेर्जी (renewable energy) उत्पादन क्षमता को तीन गुना करने का संकल्प किया है।
साल 1933 में लॉस्ट होराइजन नाम के उपन्यास में लेखक जेम्स हिल्टन ने हिमालय में कहीं बसी एक काल्पनिक वादी, शांगरी ला (Shangri La) का ज़िक्र किया था।
जर्मनी की लाइपजिग यूनीवर्सिटी में हुए ताज़ा शोध की मानें तो इस साल, बीते लगभग सवा लाख साल बाद जुलाई का महीना सबसे गर्म रहेगा।
अध्ययन उन प्रमुख लक्ष्यों को साफ़ तौर से बताता है जो 2030 तक ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिए दुनिया को हासिल करने की ज़रुरत है।
इंसान की गतिविधियों की वजह से पैदा हुए जलवायु परिवर्तन (Climate Change) ने बांग्लादेश, भारत, लाओस और थाईलैंड में रिकॉर्ड तोड़ उमस भरी ताप लहर (Heatwave) की संभावनाओं को 30 गुना तक बढ़ा दिया है।
साल 2021 में भविष्यवाणी की गई थी कि यह झील ओवरफ्लो हो जाएगी और बांध को प्रभावित करेगी। ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के कारण ग्लेशियर पिघलने (melting glaciers) के कारण ग्लेशियर झीलों की संख्या में वृद्धि हुई है।
इन तीन महीनों के दौरान, लगभग 6.2 बिलियन लोगों ने कम से कम एक दिन ऐसा अनुभव किया था जब जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी और भी बदतर हो गई थी।
हिमाचल प्रदेश में बारिश और उसके बाद हुए भूस्खलन में कम से कम 75 लोगों की जान जाने के बाद वहाँ की सरकार ने वहाँ राज्य स्तरीय आपदा घोषित कर दी। उत्तराखंड में भी हाल कुछ मिलता जुलता ही है।
बारिश की आमद गर्मी से राहत देने के लिए जानी जाती थी। मगर अब, यह राहत बन रही है आफत। भारत में चरम मौसम की घटनाओं में वृद्धि का पैमाना हर गुजरते साल के साथ नई ऊंचाई छू रहा है।
इस साल के, अरब सागर में आए, पहले चक्रवात (cyclone) 'बिपरजॉय' (Biparjoy) ने फिलहाल काफी गंभीर सूरत धारण कर ली है। लेकिन इसी बीच राहत की बात ये है कि मानसून कुछ दिनों की देरी से कल केरल पहुंच गया। मगर हां, चक्रवात की वजह से मॉनसून की गति पर प्रभाव पड़ सकता है।
पैरिस समझौते (Paris Agreement) के बाद से पवन और सौर ऊर्जा के कारण जी20 देशों में कोयले से बनने वाली बिजली की हिस्सेदारी में गिरावट आयी है।










