वैश्विक तेल कीमतों में उछाल, बढ़ते ईंधन आयात बिल और गिरते रुपये के बीच भारत एक बड़े ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है। ऐसे समय में मोनाको की एक फ़्यूल टेक्नोलॉजी कंपनी ने दावा किया है कि भविष्य का सबसे बड़ा ईंधन समाधान कहीं दूर नहीं, बल्कि पानी में छिपा हो सकता है।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वर्ष में सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद, वैश्विक कोयले की मांग में कमी आने की उम्मीद है।
एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, दुनिया भर में रिन्यूबल एनर्जी (renewable energy) को प्राथमिकता देने के मामले में एशिया सबसे तेज़ खिलाड़ी के तौर पर उभर रहा है।
एक ताजा अध्ययन के मुताबिक भारत अगर अपने रिन्यूबल एनेर्जी सम्बन्धी राष्ट्रीय लक्ष्यों को अगले 10 सालों में हासिल करता है तो बिजली उत्पादन में होने वाले कुल विकास का दो-तिहाई हिस्सा सौर और पवन ऊर्जा से आयेगा।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली भारत की सरकार ने साल 2021 में पूरी दुनिया को तब चौंका दिया था जब हमारे प्रधानमंत्री ने देश को साल 2070 तक नेट जीरो राष्ट्र (net zero nation) बनाने की योजना का ऐलान कर दिया था।
पैरिस समझौते (Paris Agreement) के बाद से पवन और सौर ऊर्जा के कारण जी20 देशों में कोयले से बनने वाली बिजली की हिस्सेदारी में गिरावट आयी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बांदा में स्थापित हुए 70 मेगावॉट के अवाडा सोलर पावर प्रोजेक्ट का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया
एक प्रमुख वैश्विक अर्थशास्त्र कंसल्टेंसी, कैंब्रिज इकोनोमेट्रिक्स की एक हालिया रिपोर्ट, तेल और गैस की कीमतों में वृद्धि की स्थिति में, रिन्यूबल एनेर्जी (Renewable Energy ) का रुख करने में तेजी लाने के महत्वपूर्ण वित्तीय लाभों को रेखांकित करती है।
रिपोर्ट में जनवरी से जून 2023 तक, पिछले साल की समान अवधि की तुलना में, 78 देशों में बिजली उत्पादन डेटा का विश्लेषण किया गया है।
एनर्जी ट्रांज़िशन (energy transition) में तेजी लाने और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से मुकाबला करने के लिए पिछले हफ्ते जी20 देशों के नेताओं ने वर्ष 2030 तक वैश्विक रिन्युब्ल एनेर्जी (renewable energy) उत्पादन क्षमता को तीन गुना करने का संकल्प किया है।
जी20 देशों की फ़ोसिल फ़्यूल सब्सिडी (Fossil Fuel Subsidy) को रिन्यूबल एनर्जी (Renewable Energy) स्रोतों में निवेश की ओर पुनर्निर्देशित करने से न केवल जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के खिलाफ लड़ाई में मदद मिल सकती है
विश्व एनर्जी ट्रांज़िशन आउटलुक को पूर्वावलोकन इस दिशा में प्रगति की नाटकीय कमी की चेतावनी देता है, साथ ही करता है 1.5 डिग्री सेल्सियस जलवायु लक्ष्य को बनाए रखने के लिए एनर्जी ट्रांज़िशन में सामरिक बदलाव की मांग






