लगभग पूरे एक दिन की गहन बातचीत के बाद, ईरान और अमेरिका के बीच की वार्ता बिना किसी समझौते के टूट गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस रविवार को इस्लामाबाद से बिना किसी शांति समझौते के ही लौट गए।
US-Iran Conflict: ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने को लेकर चल रही बातचीत में...
US-Iran Peace Deal: इज़राइल के कई मंत्रियों ने अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित उस समझौते पर नाराज़गी जताई है,...
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने रविवार को दुनिया के नेताओं से अपील की कि वे ईरान के खिलाफ युद्ध में इजरायल और अमेरिका का साथ दें। उन्होंने इसके लिए तेहरान द्वारा हाल ही में तेल अवीव पर किए गए हमलों का हवाला दिया।
ईरान पर अमेरिका के संभावित हमलों को लेकर बढ़े तनाव के बीच, एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के सामने “मिलिट्री ऑप्शन” (Military Option) रखे गए हैं।
86 साल के सुप्रीम लीडर खामेनेई ने तेहरान में अपने कंपाउंड पर हुए हमलों में मारे जाने से पहले 36 साल तक तेहरान पर राज किया था। उनकी मौत से दुनिया भर के शिया समुदाय में सदमे की लहर दौड़ गई है।
अमेरिका और Iran के बीच बढ़ते संघर्ष के वैश्विक असर अब United Kingdom की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगे हैं। एक मंत्री के अनुसार, ऊर्जा और आपूर्ति शृंखला पर दबाव के कारण ब्रिटेन में कम से कम अगले आठ महीनों तक कीमतें ऊंची रह सकती हैं।
US-Iran Deal News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ शांति बातचीत रविवार, 14 जून को पूरी...
अमेरिका के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी जहाज़ों पर हमलों के बारे में शेखी बघारी है, उन्होंने कहा कि ईरान के 46 नेवी के जहाज़ अब पकड़े जाने के बजाय डुबोए जाने के बाद “समुद्र की तलहटी में पड़े हैं।
अमेरिका (America) ईरान (Iran) के खिलाफ संभावित कार्रवाई के लिए मिडिल ईस्ट (Middle East) में और सेना इकट्ठा कर रहा है, क्योंकि पिछले 24 घंटों में 50 से ज़्यादा F-35, F-22, और F-16 फाइटर जेट इस इलाके में भेजे गए हैं।
International Energy Agency के अनुसार पश्चिम एशिया में ऊर्जा उत्पादन क्षमता पर पड़े असर को पूरी तरह बहाल करने में लगभग दो वर्ष लग सकते हैं। क्षेत्रीय तनाव और आपूर्ति बाधाओं से वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर दबाव बना हुआ है।
भारत का जोखिम बहुत कम है, जिससे वह निकट भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा जोखिमों या कीमतों में बढ़ोतरी से सुरक्षित है। रूस भारत का शीर्ष आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।












