सावन (Sawan) माह भगवान शिव जी को बेहद प्रिय है। सावन में हर सोमवार का विशेष महत्व है। पुराणों के अनुसार महादेव को प्रसन्न करने के लिए सावन माह को सर्वाेत्तम माना गया है। मान्यता है कि जो भक्त सावन सोमवार व्रत (Sawan Vrat) रख भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक और पूरे विधि विधान से पूजा करता है उसके सारे दुख दूर हो जाते हैं।
सावन (Sawan) माह शिव जी को बेहद प्रिय है। सावन का पहला सोमवार 18 जुलाई को है। सावन के हर सोमवार का विशेष महत्व है। पुराणों के अनुसार महादेव को प्रसन्न करने के लिए सावन का माह सर्वोत्तम माना गया है।
भगवान शिव (Lord Shiva) की पूजा करने का सबसे उत्तम महीना होता है सावन (Sawan) लेकिन क्या जानते हैं कि सावन के महीने का इतना महत्व क्यों है और भगवान शिव को यह महीना क्यों प्रिय है? आइए जानते हैं इसके पीछे की मान्यताओं के बारे में।
धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन के बुधवार को भगवान गणेश की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है। इस दिन विधि विधान से श्री गणेश की पूजा करने पर वे भक्तों के कष्टों को मिटाकर उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
नवरात्रि हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसे पूरे भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों में हिंदू समुदायों के साथ बड़े उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों, जैसे सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती की पूजा की जाती है।
माँ कालरात्रि साहस और दृढ़ संकल्प का प्रतीक हैं। माना जाता है कि उनकी पूजा करने से भक्त के जीवन से सभी बाधाएं और भय दूर हो जाते हैं। वह अज्ञान और अंधकार का नाश करने वाली है, अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतिनिधित्व करती है।
मान्यता है कि सावन (Sawan) मास भगवान शिव का सबसे प्रिय है। इस पूरे महीने हर तरफ हरियाली खिल उठती है। इस मास में भगवान शिव की आराधना करने पर मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
इस साल श्रावण का महीना बहुत खास होने वाला है। इस बार शिव जी को प्रसन्न करने के लिए पूरे दो माह का समय होगा। अधिक मास की वजह से इस बार सावन 4 जुलाई से 31 अगस्त तक रहेगा।
आज 4 जुलाई मंगलवार से श्रावण मास (Sawan Maas) आरंभ हो रहा है। श्रावण मास का समापन 31 अगस्त गुरुवार श्रावण पूर्णिमा को होगा। इस बार श्रावण मास अधिकमास होने के कारण 59 दिन का है। इस बार श्रावण मास में 8 सोमवार होंगे। यह दुर्लभ संयोग 19 वर्ष पूर्व सन 2004 में श्रावण मास में हुआ था।
शनिदेव के वाहन का निर्धारण जातक के जन्म, नक्षत्र संख्या और शनि के राशि बदलने की तिथि की नक्षत्र संख्या दोनों को जोड़ लें, फिर योगफल को नौ से भाग कर लें। शेष संख्या के आधार पर ही शनिदेव का वाहन का निर्धारण होता है। आइए जानते हैं इन सवारियों के परिणाम और इनसे उबरने के तरीके।
माँ चंद्रघंटा (Maa Chandraghanta) देवी दुर्गा (Devi Durga) के नौ रूपों में से एक है, जिनकी पूजा नवरात्रि उत्सव के दौरान की जाती है।
माँ कात्यायनी को अक्सर शेर पर सवार, चार भुजाओं वाली एक उग्र और शक्तिशाली देवी के रूप में चित्रित किया गया है। उन्हें आमतौर पर एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में कमल का फूल पकड़े हुए दिखाया जाता है, जबकि अन्य दो हाथ सुरक्षा और वरदान देने की मुद्रा में होते हैं।







