उत्तराखंड (Uttarakhand) में देवी-देवताओं के कई चमत्कारिक मंदिर हैं। इन्हीं में से एक मंदिर गोलू देवता (Golu Devta Mandir) का भी है। गोलू देवता को स्थानीय मान्यताओं में न्याय का देवता कहा जाता है।
शनिवार के दिन शनिदेव (Shanidev) की पूजा करने का विधान है। शनिदेव की पूजा करते समय इन मंत्रों का पाठ किया जाए तो शनिदेव प्रसन्न होते हैं। शनिदेव की पूजा करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। साथ ही जिन लोगों पर साढ़ेसाती चल रही होती है वह भी सही हो जाता है।
त्रेतायुग में भगवान श्रीराम (Shri Ram) की सहायता करने और दुष्टों का नाश करने के लिए देवाधिदेव महादेव भगवान शिव ने वानर जाति में हनुमान (Hanuman) के रूप में अवतार लिया था। हनुमान को भगवान शिव का श्रेष्ठ अवतार कहा जाता है।
भगवान श्री कृष्ण (Shri Krishna) का पांचजन्य शंख (Panchajanya Shankh) बड़ा ही विशिष्ट शंख है, यह दुर्लभ है। कहते हैं इस शंख की उत्पत्ति समुद्र मंथन के समय हुई थी। समुद्र मंथन में उत्पन्न रत्नों में छठा रत्न यही शंख था और उसके पश्चात भगवान विष्णु के पास माता लक्ष्मी तथा यह शंख सुशोभित हुए। किन्तु महाभारत में भी इस शंख की उपस्थिति का वर्णन है।
तमिलनाडु के पेरावोरानी के पास तंजावूर के विलनकुलम में अक्षयपुरीश्वर मंदिर (Akshayapureeswarar Temple) है। ये मंदिर भगवान शनि के पैर टूटने की घटना से जुड़ा हुआ है। इस मंदिर में शारीरिक रुप से परेशान और साढ़े साती में पैदा हुए लोग शनिदेव की विशेष पूजा के लिए आते हैं।
गैर-हिंदू को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं
तमिलनाडु के मदुरै में भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu) को समर्पित अनोखा कूडल अझगर मंदिर (Koodal Azhagar Mandir) है। आठ हिस्सों में बने हुए इस मंदिर का शिखर ऐसा है, जिसकी परछाई धरती पर नहीं पड़ती। इस मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति बैठी हुई मुद्रा में है। यह मूर्ति देखने में बहुत ही दिव्य और भव्य लगती है।
महाभारत के एक खंड में दी गई जानकारी के अनुसार भगवान शिव, पार्वती और नारद जी के बीच हो रही बातचीत के दौरान बताया गया है कि शिव जी की तीसरी आंख कैसे उत्पन्न हुई थी और क्या है इसका रहस्य!
एक बार गणपति (Ganapati) मुनि पुत्रों के साथ पाराशर ऋषि के आश्रम में खेल रहे थे, तभी वहां कुछ नाग कन्याएं आ गईं। ये नाग कन्याएं गणेश को आग्रह पूर्वक अपने लोक लेकर जाने लगी। गणपति भी उनका आग्रह ठुकरा नहीं सके और उनके साथ चले गए। नाग लोक पहुंचने पर नाग कन्याओं ने उनका हर तरह से सत्कार किया। तभी नागराज वासुकि ने गणेश को देखा और उपहास के भाव से उनके रूप का वर्णन करने लगे। गणेश को क्रोध आ गया। उन्होंने वासुकि के फन पर पैर रख दिया और उनके मुकुट को भी स्वयं पहन लिया।
इंदौर के हृदय स्थल राजवाड़ा में एक ऐसा प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर है, जहां दीपावली के अवसर पर लाखों भक्तों की भीड़ अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए पूजा-अर्चना करती है। यहां महालक्ष्मी के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।
जब श्रीकृष्ण अर्जुन को गीता का उपदेश दे रहे थे तब उन्होंने ये भी बोला था कि ये उपदेश पहले भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu) के रूप में सूर्यदेव को दे चुके हैं। तब अर्जुन ने आश्चर्य से कहा कि सूर्यदेव तो प्राचीन देवता हैं, आप उनको ये उपदेश पहले कैसे दे सकते हैं।
बजरंगबली (Bajrangbali) को भगवान भोलेनाथ का ग्यारहवां अवतार भी माना गया है। उन्हें कलयुग का देवता कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जो भी व्यक्ति मंगलवार को विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा करता है, उसके जीवन के सारे संकट दूर हो जाते हैं।
