जो भी वस्तु इस बरमूडा त्रिभुज के पास जाता है, उसका नामोनिशान तक नहीं मिलता। वहीं, माना जाता है कि इस रहस्यमय बरमूडा त्रिभुज का संबंध भगवान हनुमान जी (Hanuman ji) के साथ है।
जगतपिता ब्रह्मा (Jagatapita Brahma) के मन में बाल कृष्ण (Bal Krishna) की परीक्षा लेने का विचार आया। उन्होंने कुछ ऐसा...
भारत में कई ऐसे स्थान हैं, जिनका नामकरण वहां के कुल देवता या देवी के नाम पर हुआ है। बिहार (Bihar) के भोजपुर (Bhojpur) जिले का मुख्यालय आरा भी एक ऐसा ही शहर है, जिसका नामकरण अरण्य देवी (Aranya Devi) के नाम पर हुआ है। यहां के लोग इन्हें आरन देवी (Aaran Devi) भी कहते हैं।
भारत में उड़ीसा के कोणार्क का सूर्य मंदिर ऐसे तो विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन उत्तराखंड (Uttarakhand) की पवित्र देवभूमि में भी भगवान सूर्यदेव साक्षात विराजते हैं कटारमल सूर्य मंदिर (Katarmal Surya Mandir) के रूप में।
सबसे पहले हनुमानजी ने भगवान राम को समर्पित एक रामायण चट्टान पर लिखी थी। उन्होंने लेखनी के लिए अपने नाखूनों का इस्तेमाल किया। उन्होंने यह कथा वाल्मीकि से भी पहले लिखी थी।
हर किसी को मालूम है कि गणेश जी (Ganesh ji) को मोदक और मिठाई कितनी पसंद है। शायद इसलिए वो किसी के भी निमंत्रण को स्वीकार कर लेते हैं और मन भर कर मोदक और मिठाई खाते हैं।
गोवर्धन लीला (Govardhan Leela) के बाद समस्त ब्रजमंडल (Brajmandal) में श्री कृष्ण (Shri Krishna) के नाम की चर्चा होने लगी। सभी ब्रजवासी (Brajvasi) कृष्ण की जय-जयकार कर रहे थे और उनकी महिमा का गान कर रहे थे। ब्रज के गोप-गोपियों के मध्य कृष्ण की ही चर्चा थी।
शनिवार का दिन शनिदेव (Shanidev) की पूजा के लिए खास माना जाता है। शनिदेव के अशुभ प्रभाव को कम करने व उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विभिन्न प्रकार के पूजन किए जाते हैं। शनिवार को कौन सा कार्य करना चाहिए व कौन सा नहीं, इन बातों का भी ध्यान रखना चाहिए। जिससे अनजाने में भी शनिदेव का कुप्रभाव न पड़े।
शेषनाग की हुंकार से आज भी खौलता है यहाँ का पानी
वरदविनायक मंदिर (Varadvinayak Temple) भगवान गणेशजी (Lord Ganesha) के अष्टविनायको (Ashtavinayak) में से एक है। यह मंदिर भारत में महाराष्ट्र राज्य के रायगढ़ जिले के कर्जत और खोपोली के पास खालापुर तालुका के महड गाँव में स्थित है।
आमलकी एकादशी (Amalaki Ekadashi) व्रत आज 3 मार्च को है। होली (Holi) से पहले आमलकी एकादशी का विशेष महत्व है। क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की पूजा के साथ शंकर-पार्वती के साथ होली खेलने की परंपरा है, इसलिए इसे रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।












