शनिदेव को हिंदू धर्म में कर्म फल दाता माना जाता हैं, इसलिए इन्हे कठोर भी माना जाता है। दरअसल शनि...
पटन देवी भी दो हैं- छोटी पटन देवी और बड़ी पटन देवी, दोनों के अलग-अलग मंदिर हैं। पटना की नगर रक्षिका भगवती पटनेश्वरी (Pataneshwari) हैं जो छोटी पटन देवी के नाम से भी जानी जाती हैं। यहां मंदिर परिसर में मां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की स्वर्णाभूषणों, छत्र व चंवर के साथ विद्यमान हैं। लोग प्रत्येक मांगलिक कार्य के बाद यहां जरूर आते हैं। इस मंदिर के पीछे एक बहुत बड़ा गड्ढा है, जिसे ‘पटनदेवी खंदा’ कहा जाता है।
अनमोल कुमार बिहार की राजधानी पटना में स्थित पटन देवी मंदिर शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। देवी...
महावीर मदिर में चढ़ाया जाने वाला प्रसाद नैवेद्यम लोगों की आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है। इसके स्वाद, शुद्धता और पवित्रता का हर व्यक्ति कायल है।
सबसे पहले हनुमानजी ने भगवान राम को समर्पित एक रामायण चट्टान पर लिखी थी। उन्होंने लेखनी के लिए अपने नाखूनों का इस्तेमाल किया। उन्होंने यह कथा वाल्मीकि से भी पहले लिखी थी।
उत्तराखंड (Uttarakhand) पिथौरागढ़ (Pithoragarh) जिला से करीब 90 किलोमीटर दूर गंगोलीहाट के भुवनेश्वर गांव में पाताल भुवनेश्वर गुफा (Patal Bhubaneswar Cave) स्थित है। यह गुफा समुद्र तल से 1350 किलोमीटर की ऊंचाई पर है। यह गुफा किसी आश्चर्य से कम नहीं है। यह प्रवेश द्वार से 160 मीटर लंबी और 90 फीट गहरी है।
अनमोल कुमार गरुड़ पुराण सहित कई धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि यदि पंचक में किसी की मृत्यु हो जाए...
बिहार की राजधानी पटना को प्राचीन समय में मगध की राजधानी के रूप में जाना जाता था, लेकिन साल 1912 में इस बिहार की स्थापना के बाद पटना शहर को राजधानी के रूप में जाना जाने लगा।
बिहार की राजधानी पटना के हृदयस्थली अवस्थित उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध मंदिर है। सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में शामिल पटना जंक्शन स्थित महावीर मंदिर (Mahavir Mandir) में राम नवमी (Ram Navami) के दिन अयोध्या की हनुमानगढ़ी के बाद सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ती है।
गोवर्धन लीला (Govardhan Leela) के बाद समस्त ब्रजमंडल (Brajmandal) में श्री कृष्ण (Shri Krishna) के नाम की चर्चा होने लगी। सभी ब्रजवासी (Brajvasi) कृष्ण की जय-जयकार कर रहे थे और उनकी महिमा का गान कर रहे थे। ब्रज के गोप-गोपियों के मध्य कृष्ण की ही चर्चा थी।
यह कराची में उन हिंदुओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण मंदिर है, जो भारत में गंगा या सिंधु के किनारे की यात्रा नहीं कर सकते।
आज एक विशेष शिव मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जिसे मनुष्य नहीं, बल्कि पारलौकिक शक्तियों ने बनाया है। यह एलोरा (Ellora) का कैलाश मंदिर (Kailash Temple) है जो कि औरंगाबाद (Aurangabad) में है।







