यह मंदिर उड़ीसा (Odisha) के टिटलागढ़ (Titlagarh) में मौजूद है। ऐसा कहा जाता है कि मंदिर के दरवाजे बंद कर देने पर इस मंदिर के अंदर बहुत अधिक ठंडक बढ़ जाती है।
जयपुर की नाहरगढ़ पहाड़ी पर स्थित मंदिर में गणेश जी के बाल रूप की प्रतिमा स्थापित है। गणेश जी के बाल रूप को देखकर यहां आने वाला हर भक्त मंत्रमुग्ध हो जाता है। बिना सूंड़ वाले गणेश जी को देखकर लोग चकित भी हो जाते हैं।
इस वर्ष रामनवमी के पर्व पर एक साथ कई तरह का दुर्लभ संयोग बन रहा है। राम नवमी पर अमृत सिद्धि योग, गुरु पुष्य योग, शुभ योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग बन रहे हैं। इसके अलावा रामनवमी गुरुवार के दिन पड़ने से इसका महत्व काफी और भी बढ़ गया है।
भगवान राम और रावण के बीच युद्ध की कहानी को भी नवरात्रि से जोड़कर देखी जाती है। कहते हैं कि जिस वक्त श्री राम सीता को रावण से छुड़ाने के लिए युद्ध लड़ रहे थे। उस समय रावण पर विजय पाने के लिए भगवान श्री राम ने देवी दुर्गा का अनुष्ठान किया था, जो पूरे 9 दिनों तक चला था।
महावीर मदिर में चढ़ाया जाने वाला प्रसाद नैवेद्यम लोगों की आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है। इसके स्वाद, शुद्धता और पवित्रता का हर व्यक्ति कायल है।
बहुत कम लोग भगवान शिव भगवान शिव (Lord Shiva) के एक ऐसे अवतार के बारे में जानते होंगे जिन्होंने शनिदेव (Shanidev) पर प्रहार किया था। उसकी के कारण शनिदेव की गति मंद हो गई।
इस हनुमान मंदिर (Hanuman Mandir) को हनुमानगढ़ी (Hanumangarhi) के नाम से जाना जाता है। नैनीताल के अतिरिक्त भारत के अन्य प्रदेशों में भी हनुमान गढ़ी के नाम से कई मंदिर प्रसिद्ध हैं।
नवरात्रि उत्सव में अष्टमी और नवमी दो महत्वपूर्ण दिन हैं, जो नौ दिनों की अवधि में मनाए जाते हैं। ये दिन हिंदू पौराणिक कथाओं में महत्वपूर्ण महत्व रखते हैं और बड़ी भक्ति और उत्साह के साथ मनाए जाते हैं।
बिहार की राजधानी पटना के हृदयस्थली अवस्थित उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध मंदिर है। सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में शामिल पटना जंक्शन स्थित महावीर मंदिर (Mahavir Mandir) में राम नवमी (Ram Navami) के दिन अयोध्या की हनुमानगढ़ी के बाद सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ती है।
झारखंड की राजधानी रांची से करीब 80 किलोमीटर की दूरी पर रजरप्पा में छिन्नमस्तिका देवी (Chinnamastika Devi) का मंदिर स्थित है। ये मंदिर शक्तिपीठ के रूप में काफी विख्यात है।
देहरादून स्थित मां संतला देवी मंदिर (Maa Santala Devi Mandir) भक्तों की आस्था का केंद्र है। मंदिर में शनिवार को भक्तों का जमावड़ा लगता है, माना जाता है कि हर शनिवार को मां संतला देवी एक पत्थर की मूर्ति में परिवर्तित हो जाती हैं।
Kamada Ekadashi: धर्मराज युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवन्! मैं आपको कोटि-कोटि नमस्कार करता हूँ। अब आप कृपा करके चैत्र...












