बिहार के दरभंगा जिले में मां काली का यह भव्य मंदिर मौजूद है, जिन्हें यहां भक्त श्यामा माई (Shyama Mai) के नाम से पुकारते हैं। इस मंदिर के निर्माण की कहानी जिसे सुनकर सब हैरान हो जाते हैं। मां काली का यह मंदिर दरभंगा राज परिवार के महान साधक महाराज रामेश्वर सिंह की चिता पर बना है।
तिरुनलार सनीश्वरन मंदिर (Tirunallar Saneeswaran Temple) या धरबरनीश्वर मंदिर (Dharbarneeshwar Temple) भारत के पांडिचेरी के कराईकल जिले में भगवान शनि (Shanidev) को समर्पित मंदिरों में से एक है।
पुणे से 51 किमी दूर रंजनगांव में एक पौराणिक गणपति मंदिर है। हिन्दू धर्म ग्रंथों के मुताबिक इस स्थान पर...
हिंदुओं की आस्था के केंद्र यमुनोत्री धाम स्थान यमुनोत्तरी हिमनद से 5 मील नीचे दो वेगवती जलधाराओं के मध्य एक कठोर शैल पर है। बांदरपूंछ के पश्चिमी छोर के एक संकरे स्थान पर पवित्र यमुनाजी का मंदिर है।
छपरा जिला मुख्यालय से महज दस किमी की दूरी पर स्थित पैराणिक गोदना, वर्तमान में रिविलगंज, के विषय में कम जानते होंगे। वस्तुत: यह क्षेत्र आरण्यक संस्कृति का प्रतिविम्ब है। घाघरा के तट पर यह स्थान ऋषि-मुनियों का साधना क्षेत्र रहा है। त्रेता युग में इसी स्थान पर महर्षि श्रृंगी के द्धारा कराए गए पुत्र्येष्टि यज्ञ के कारण ही प्रभु श्रीराम का जन्म हुआ था।
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार युद्ध में राजा दशरथ (Raja Dashrath) का मुकाबला बाली से हो गया। राजा दशरथ की तीनों रानियों में से कैकयी अस्त्र-शस्त्र और रथ चालन में पारंगत थीं।
राजस्थान के सवाई माधौपुर से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर रणथंभौर के किले में बना यह गणेश मंदिर की स्थापना
शनि देव के पैर में खराबी का गवाह है अक्षयपुरीश्वर मंदिर
बांदरपूंछ के पश्चिमी छोर के एक संकरे स्थान पर पवित्र यमुनाजी का मंदिर (Yamunaji ka Mandir) है। परंपरागत रूप से यमुनोत्री (Yamnotri) चार धाम यात्रा (Char Dham Yatra) का पहला पड़ाव है।
उत्तराखंड (Uttarakhand) का त्रियुगीनारायण मंदिर (Triyuginarayan Mandir) ही वह पवित्र और विशेष पौराणिक मंदिर है, जहां भगवान शिव और पार्वती जी ने पवित्र अग्नि को साक्षी मानकर विवाह किया था। इस मंदिर के अंदर सदियों से यह अग्नि जल रही है।
भारत के धार्मिक स्थल विशेषकर मंदिर एक से बढ़कर एक रहस्य अपने में समेटे हुए हैं। ऐसा ही एक मंदिर है उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जनपद के पाटन गांव में सिरिया नदी के तट पर स्थित मां पाटेश्वरी का मंदिर (Maa Pateshwari Mandir)। इस मंदिर के कारण ही इस पूरे मंडल का नाम देवीपाटन पड़ा हुआ है।
जमीन पर गिरे मांस का पहला हिस्सा लहसुन में बदल गया और दूसरा हिस्सा जो तालाब में गिरा वह मछली बन गया। जमीन पर गिरी खून की बूंदें लाल मसूर बन गईं, त्वचा प्याज में बदल गई और हड्डी लाल साग में बदल गई। इसलिए कहा जाता है कि रविवार के दिन इन चीजों को खाना अशुभ होता है







