गिरगांव चौपाटी पर प्रस्तावित क्रिसमस महोत्सव को लेकर कानूनी नोटिस, 7 दिन में जवाब देने की मांग

मुंबई: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेता अविनाश पांचाल ने मुंबई के गिरगांव चौपाटी पर प्रस्तावित ‘प्रभु यीशु जन्मोत्सव 2026’ को लेकर आयोजकों, प्रायोजकों, कलाकारों और धार्मिक नेताओं को कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में आयोजन के लिए आवश्यक वैधानिक अनुमतियों, पर्यावरणीय मंजूरियों और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

अधिवक्ता पंकज पी. मनेचकर के माध्यम से भेजे गए 22 पन्नों के इस नोटिस में 13 दिसंबर 2026 को प्रस्तावित मुंबई क्रिसमस म्यूजिकल फेस्टिवल का उल्लेख है। नोटिस में संबंधित पक्षों से सात दिनों के भीतर सरकारी अनुमतियों, ऑडिट रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन का विवरण देने की मांग की गई है।

नोटिस के अनुसार, आयोजन के पोस्टर और बैनर में कार्यक्रम को ‘कन्फर्म’ बताया गया है, जबकि संबंधित अधिकारियों से आवश्यक अनुमति और अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) मिलने का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। नोटिस में बॉम्बे हाईकोर्ट के 29 नवंबर 2022 के आदेश और जनहित याचिका संख्या PIL No. 3443/2019 का भी उल्लेख किया गया है।

पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर उठाए सवाल
कानूनी नोटिस में गिरगांव चौपाटी के तटीय पर्यावरण पर आयोजन के संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरियों के बिना लगभग 100×80 फीट का अस्थायी मंच तैयार करने की योजना है।

नोटिस में तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम, ध्वनि प्रदूषण, प्लास्टिक एवं ठोस कचरे के निपटान और डीजल जनरेटर के इस्तेमाल से होने वाले संभावित प्रदूषण का भी मुद्दा उठाया गया है। इसके अलावा, आयोजन के दौरान भारी भीड़ और अस्थायी ढांचे से तटीय पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और उपलब्ध दस्तावेज में संबंधित अधिकारियों की ओर से आयोजन की पर्यावरणीय मंजूरी की स्थिति पर कोई आधिकारिक जवाब शामिल नहीं है।

चंदे और वित्तीय लेनदेन पर पारदर्शिता की मांग
नोटिस में सार्वजनिक चंदे और प्रायोजन राशि के संग्रह के साथ-साथ प्रीमियम दरों पर सीटें और सोफे उपलब्ध कराने के मामले पर भी सवाल उठाए गए हैं।

इसमें आयोजक संस्था का विवरण, धनराशि के इस्तेमाल, बैंक खातों और वैधानिक ऑडिट से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की गई है। नोटिस में धन संग्रह और संबंधित वित्तीय नियमों के अनुपालन को लेकर कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।

आयोजकों और अन्य संबंधित लोगों का उल्लेख
नोटिस में ग्लोरी टू गॉड टीम से जुड़े सदस्यों, कुछ पादरियों, फर्टाडोस म्यूजिक इंडिया, RESOUND बैंड, हार्मनी फाउंडेशन और प्रभु यीशु जन्मोत्सव समिति 2026 सहित कई व्यक्तियों एवं संस्थाओं के नाम शामिल हैं।

दस्तावेज में आयोजन से जुड़े कुछ व्यक्तियों के संबंध में अदालती कार्यवाही, आपराधिक मामलों और शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है। इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश में कथित गैरकानूनी धर्मांतरण से संबंधित मामलों का हवाला देते हुए आशंका जताई गई है कि सांस्कृतिक कार्यक्रम की आड़ में ऐसी गतिविधियां हो सकती हैं।

ये सभी आरोप कानूनी नोटिस में किए गए दावों पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित अदालतों के रिकॉर्ड और जांच एजेंसियों से जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है। केवल कानूनी नोटिस जारी होने से उसमें लगाए गए आरोप सिद्ध नहीं हो जाते।

सात दिन में सार्वजनिक स्पष्टीकरण देने की मांग
नोटिस में कार्यक्रम और उसके प्रचार-प्रसार को वापस लेने या रोकने की मांग की गई है। साथ ही, संबंधित पक्षों से सात दिनों के भीतर आयोजन करने वाली संस्था, सरकारी अनुमतियों, दान एवं प्रायोजन राशि, बैंक खातों और ऑडिट की स्थिति पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।

नोटिस में चेतावनी दी गई है कि निर्धारित अवधि में मांगें पूरी नहीं होने पर बॉम्बे हाईकोर्ट, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और संबंधित अधिकारियों के समक्ष आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

उपलब्ध दस्तावेज में यह जानकारी नहीं है कि नोटिस प्राप्त करने वाले पक्षों ने कोई जवाब दिया है या नहीं। साथ ही, प्रस्तावित आयोजन को आवश्यक अनुमतियां मिली हैं या उसे रद्द किया गया है, इसकी भी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।