क्या है विद्युत संशोधन विधेयक 2022 में ख़ास, क्यों हो रहा है इसका विरोध, क्या कहना है विशेषज्ञों का?
भारत में हरित निवेश प्रवाह को ट्रैक करने के अपने तरह के एक पहले प्रयास को प्रस्तुत करती एक ताज़ा रिपोर्ट की मानें तो फिलहाल देश में इस निवेश के प्रवाह की दशा और दिशा चिंताजनक है।
चार्जिंग ढांचे को तेजी से विस्तार देना, वित्तीय समाधान पेश करना, अधिदेश (मैन्डेट) पेश करना और सम्बन्धित राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा के अनुरूप सरकारी नीतियां बनाना ई-मोबिलिटी में तेजी लाने के लिये बेहद महत्वपूर्ण
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की वायु गुणवत्ता (Air Quality) के सम्पूर्ण सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण (Air Pollution) के खतरे को कम करने के लिए एक व्यापक नीति तैयार की है।
दरअसल आर्थिक और राजनीतिक निर्णयों ने मुख्य रूप से प्रकृति के कुछ ही मूल्यों को प्राथमिकता दी है। इनमें विशेष रूप से प्रकृति के बाजार-आधारित मूल्य, जैसे खाद्य पदार्थ, प्राथमिकता पाते हैं। इसके अलावा, नीति निर्धारण कि प्रक्रिया में आमजन के लिए प्रकृति के योगदान से जुड़े कई गैर-बाजार मूल्यों की अनदेखी होती है, जैसे कि जलवायु विनियमन और सांस्कृतिक पहचान।
भारत, नाइजीरिया, फिलीपींस और अफ्रीका समेत 33 देशों के बच्चे एक साथ हीटवेव, बाढ़, चक्रवात, बीमारी, सूखा और वायु प्रदूषण जैसे जलवायु प्रभावों का सामना कर रहे हैं। मगर इस सब के बावजूद, भारत में, बच्चों को दी जाने वाली जानकारी उतनी नहीं जितनी संभवतः आवश्यक है। और मानो इतना काफ़ी न हो, एनसीईआरटी (NCERT) ने हाल ही में इस संदर्भ में अपने स्कूल पाठ्यक्रम में जो बदलाव कर दिये हैं वो हैरान करने वाले हैं।
धरती के 7,000 से अधिक शहरों में हुए वायु गुणवत्ता विश्लेषण ने पेश की परेशान करने वाली तस्वीर
भारत अब अपने सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता को 2030 तक 45 प्रतिशत तक कम करने के लिए प्रतिबद्ध
दुनिया के स्टार्टअप इकोसिस्टम (Startups Ecosystem) या समुदाय के आकार की बात करें तो भारत, अमेरिका और चीन के बाद...
यूरोप के तमाम विकसित देश अक्सर भारत जैसे विकासशील देशों पर अधिक कार्बन एमिशन (carbon emission) का आरोप लगाते हैं और उम्मीद करते हैं कि वो अपना एमिशन सतत गति से कम करें और एनेर्जी ट्रांज़िशन (energy transition) की सोचें, लेकिन आज हालात ऐसे बन गए हैं कि यूरोप ख़ुद एक ऊर्जा संकट (energy crisis) की मझधार में फंसा दिख रहा है।
हर पांच में से एक व्यक्ति अपनी आमदनी और भोजन के लिये वन्यजीव प्रजातियों पर है निर्भर। इंसान के भोजन के लिये 10 हजार वन्यजीव प्रजातियों का होता है दोहन
फिलहाल प्रदूषण को लेकर जो भी नीतिगत निर्णय और कार्य किये जा रहे हैं, वे सभी सर्दियों के कुछ महीनों को ध्यान में रखकर ही हो रहे हैं। हालांकि सच्चाई यह है कि हम साल के ज्यादातर महीनों में वायु प्रदूषण के उच्च स्तरों की जद में होते हैं जिनका मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए यह ज़रूरी है कि वायु प्रदूषण से निपटान के लिए नीतीयां सिर्फ सर्दियों को नहीं बल्कि गर्मियों के महीनों को भी ध्यान में रख कर बनाई जाएँ।