वैश्विक तेल कीमतों में उछाल, बढ़ते ईंधन आयात बिल और गिरते रुपये के बीच भारत एक बड़े ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है। ऐसे समय में मोनाको की एक फ़्यूल टेक्नोलॉजी कंपनी ने दावा किया है कि भविष्य का सबसे बड़ा ईंधन समाधान कहीं दूर नहीं, बल्कि पानी में छिपा हो सकता है।
ऊर्जा क्षेत्र की देश की अग्रिणी सार्वजनिक गैर बैंकिंग वित्तीय कम्पनियां (NBFC) पीएफसी और आरईसी नई प्रौद्योगिकियों (पवन बिजली सौर ऊर्जा बैटरी स्टोरेज और इलेक्ट्रिक वाहन आदि) के हिसाब से खुद को पर्याप्त रूप से बदल नहीं पाई हैं जिसके चलते इनके विकास और मुनाफ़ा कमाने की दर ठहरी हुई है।
ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) को डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लक्ष्य को पहुंच के भीतर बनाए रखने के लिए सदी के मध्य तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन तक पहुंचने की राह में 2050 तक तेल और गैस के उपयोग में 75% से ज़्यादा कटौती करनी होगी।



