भगवान शिव (Lord Shiva) नटराज के रूप में संगीत कला के सर्जक व संरक्षक माने जाते हैं। डमरु (Damru) उनका विशेष वाद्ययंत्र है। 'डमरु' शब्द सुनते ही जो पहली तस्वीर आंखों के सामने आती है, वह है डमरु बजा कर नृत्य करते हुए भगवान शिव की।
शिव का अवतार हनुमान जी ही थे और यह भी सत्य है कि भगवान राम (Bhagwan Ram) ही शिव (Bhagwan...
मृत्यु का पल या मृत्यु की संभावना अधिकतर लोगों के जीवन का सबसे तीव्र अनुभव होता है। उनमें से अधिकांश...
भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शास्त्रों में कई विधि-विधान बताए गए हैं। जिसमें भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, दूध अर्पित करने आदि का भी उल्लेख मिलता है। आइए जानें कि शिवलिंग पर दूध क्यों चढ़ाया जाता है और ऐसा करने से क्या होता है?
भगवान गणेश सुख-संपत्ति के दाता हैं। किसी भी काम को शुरू करने से पहले भगवान गणेश की वंदना की जाती है। क्या आपको पता है गणपति का स्वरूप आपको कई तरह के संदेश देता है। आपको बता रहे हैं भगवान गणेश के स्वरूप में छिपे संदेशों के बारे में।
गणपति (Ganpati) की महिमा को सभी जानते हैं और यह भी जानते हैं कि वे माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र हैं। लेकिन बहुत कम लोग हैं जो इससे आगे गणेश के परिवार के बारे में जानते हैं, उनकी पत्नी और बच्चों के बारे में जानते हैं।
ये कहानी भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के नरसिंह अवतार (Narsingh Avtaar) से जुड़ी हुई है। प्रह्लाद की रक्षा के लिए श्रीहरि ने नरसिंह अवतार धारण करके हिरण्यकशिपु का वध अपने पंजे से कर दिया। लेकिन भक्त पर हुए अत्याचार से नाराज नरसिंह पूरी सृष्टि के विनाश के लिए उतारु हो गए।
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भगवान शिव को समर्पित श्री राजा राजेश्वर स्वामी मंदिर (Sri Raja Rajeswara Swamy Temple) के तेलंगाना के वेमुलावाड़ा में स्थित है। यह मंदिर प्राचीन और प्रसिद्ध शिव मंदिरों में से एक है। मंदिर के प्रमुख देवता स्थानीय रूप से राजन्ना के रूप में लोकप्रिय हैं। मुख्य देवता की मूर्ति नीला लोहिता शिव लिंगम के रूप में है। देवता के साथ ही श्री राजा राजेश्वरी देवी और सिद्धि विनायक की मूर्तियाँ हैं।
देवताओं की सेना के सेनापति कार्तिकेय (Kartikeya) या मुरुगन भगवान (Lord Murugan) शिव और माता पार्वती के सबसे बड़े पुत्र हैं । हालांकि संपूर्ण भारत में ही कार्तिकेय की पूजा की जाती है
महर्षि वेद व्यास रचित महाभारत के मौसल पर्व में भगवान श्रीकृष्ण की मृत्यु और उनकी द्वारका नगरी के समुद्र में समा जाने का विवरण दिया गया है।
उत्तराखंड (Uttarakhand) राज्य के रुद्रप्रयाग (Rudraprayag) शहर से 3 किलोमीटर दूर प्राचीन कोटेश्वर महादेव मंदिर (Koteshwar Mahadev Mandir) स्थित है। इस मंदिर का निर्माण 14वीं शताब्दी में किया गया था।







