मौसम संबंधी किसी भी पूर्वानुमान के लिए मौसम विज्ञानियों की मदद ली जाती है। लेकिन क्या आपने कभी किसी ऐसी जगह के बारे में सुना या सोचा है, जहां खुद भगवान मौसम के बदलाव की जानकारी देते हैं। इसके साथ ही स्थानीय निवासी इस इलाके में मंदिर से गिरने वाली बूंदों से ही खेतों में जुताई और बुवाई का समय तय करते हैं।
राजस्थान (Rajasthan) में झालरापाटन (Jhalrapatan) का सूर्य मंदिर (Surya Mandir) अपनी प्राचीनता और स्थापत्य वैभव के कारण कोणार्क के सूर्य मंदिर और ग्वालियर (Gwalior) के 'विवस्वान मंदिर' (Vivaswan Temple) का स्मरण कराता है।
महाशिवरात्रि (Mahashivratri) से पहले मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) आती है, उत्तर भारतीय कैलेंडर के अनुसार, मौनी अमावस्या माघ महीने के...
वेद, आयुर्वेद, ज्योतिष और हस्तरेखा शास्त्रों में है सूर्य का महत्त्व
पुराणों में वर्णन है कि एक बार यमराज की मृत्यु हुई थी। यमराज बड़े भयानक रूप के देवता है, जो...
आज जानिए छत्तीसगढ़ के चमत्कारिक राजीव लोचन मंदिर (Rajiv Lochan Mandir) के बारे में। यह मंदिर चतुर्थाकार में बनाया गया...
हनुमानजी को आने जाने के लिये मात्र दो घण्टे का समय मिला था। इस मात्र दो घंटे में हनुमान जी द्रोणगिरी पर्वत हिमालय पर जाकर वापस 5000 किलोमीटर की यात्रा करके आये थे। अर्थात उनकी गति ढाई हजार किलोमीटर प्रति घंटा रही होगी।
उर्मिला के विषय में उसकी निद्रा बड़ी प्रसिद्ध है जिसे "उर्मिला निद्रा" (Urmila Nidra) कहा जाता है। अपने 14 वर्ष के वनवास में लक्ष्मण एक रात्रि के लिए भी नहीं सोये।
महाशिवरात्रि (Mahashivratri) से पहले मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) आती है, उत्तर भारतीय कैलेंडर के अनुसार, मौनी अमावस्या माघ महीने के...
वाराणसी (Varanasi) में काशी विश्वनाथ (Kashi Vishwanath) के अलावा मां दुर्गा (Maa Durga) का भी एक दिव्य और पुरातन मंदिर भी है। लाल पत्थरों से बने इस मंदिर में माता के कई स्वरूपों का दर्शन करने का सौभाग्य मिलता है। इसकी भव्यता ऐसी है कि कहा जाता है कि मंदिर परिसर में जाने वाले भक्त मां की प्रतिमा को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। मंदिर में एक अलग तरह की सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह महसूस होता है।
कंस को मारने के बाद भगवान श्रीकृष्ण (Lord Shri Krishna) कारागृह में गए और वहां से माता देवकी तथा पिता...
माता सती (Mata Sati) के जहां-जहां अंग गिरे, वहां शक्तिपीठ (Shaktipeeth) के रूप में स्थापना हुई। धर्मग्रंथों में कुल 51 शक्तिपीठों की मान्यता है। इन्हीं शक्तिपीठों में एक हैं माता हरसिद्धि हैं। यहां माता सती की कोहनी गिरी थी। इनका मंदिर मध्यप्रदेश के उज्जैन (Ujjain) और गुजरात (Gujarat) के द्वारका दोनों जगह स्थित हैं।





