शनिदेव (Shanidev) को ग्रहों में न्यायाधीश का पद प्राप्त है। वह मनुष्य के अच्छे-बुरे कर्मों का फल देते हैं। शनिदेव...
ज्योतिष एवं वास्तुशास्त्र के अनुसार पश्चिम दिशा के स्वामी शनि देव हैं इसलिए यहां भगवान शनि देव की मूर्ति पश्चिममुखी...
अनमोल कुमार शनिदेव (Shanidev) की 8 पत्नियों के बारे में कम लोगों को ही जानकारी होगी। ये भी मान्यता है...
शनिदेव (Shanidev) ने अपनी साधना तपस्या द्वारा शिवजी को प्रसन्न कर अपने पिता सूर्य की भाँति शक्ति प्राप्त की और शिवजी ने शनि देव को वरदान मांगने को कहा। तब शनि देव ने प्रार्थना की कि युगों-युगों में मेरी माता छाया की पराजय होती रही हैं, मेरे पिता पिता सूर्य द्वारा अनेक बार अपमानित किया गया हैं।
शनिवार का दिन शनिदेव (Shanidev) की पूजा के लिए खास माना जाता है। शनिदेव के अशुभ प्रभाव को कम करने व उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विभिन्न प्रकार के पूजन किए जाते हैं। शनिवार को कौन सा कार्य करना चाहिए व कौन सा नहीं, इन बातों का भी ध्यान रखना चाहिए। जिससे अनजाने में भी शनिदेव का कुप्रभाव न पड़े।
सूर्य पुत्र शनिदेव (Shanidev) को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं कि वह गुस्सैल, भावहीन और निर्दयी हैं। लेकिन यह सत्य नहीं है, शनिदेव न्याय के देवता हैं। इसी वजह से भगवान शिव ने शनि महाराज को नवग्रहों में न्यायाधीश का काम सौंपा है।
जब भगवान श्री कृष्ण ने जन्म लिया तो सभी देवी-देवता उनके दर्शन करने नंदगांव पधारे। कृष्णभक्त शनिदेव भी देवताओं संग श्रीकृष्ण के दर्शन करने नंदगांव पहुंचे। परंतु मां यशोदा ने उन्हें नंदलाल के दर्शन करने से मना कर दिया। मां यशोदा को डर था कि शनिदेव कि वक्र दृष्टि कहीं कान्हा पर न पड़ जाए। शनिदेव को यह अच्छा नहीं लगा और वो निराश होकर नंदगांव के पास जंगल में आकर तपस्या करने लगे। शनिदेव का मानना था कि पूर्णपरमेश्वर श्रीकृष्ण ने ही तो उन्हें न्यायाधीश बनाकर पापियों को दण्डित करने का कार्य सौंपा है।
ज्योतिष एवं वास्तुशास्त्र के अनुसार पश्चिम दिशा के स्वामी शनि देव हैं इसलिए यहां भगवान शनि देव की मूर्ति पश्चिममुखी...
भगवान गणेश (Lord Ganesha) के शीश कटने को लेकर पुराणों में कई कथाएं प्रचलित हैं। इन्हीं में से एक कथा है कि शनिदेव (Shanidev) के कारण ही भगवान गणपति का शीश कटा था। ब्रह्मवैवर्तपुराण में इस कथा का वर्णन है।
ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव (Shanidev) को कर्मफल दाता कहा जाता है। वहीं लाल किताब में शनि को पापी ग्रह का दर्जा दिया गया है। राहु और केतु इसके सेवक हैं। यह तीनों ग्रह एक साथ मिलकर कुंडली में खतरनाक स्थिति बनाते हैं। कुंडली में शनि शुभ योग में हो तो जातक को शुभ फल मिलते हैं।
सूर्यपुत्र शनिदेव (Shanidev) भगवान जी कहते हैं मैं गुरुओं का भी गुरु हूं और योद्धाओं का भी योद्धा हूं योगियों...
शनिदेव (Shanidev) को न्याय का देवता कहा जाता है। शनिदेव अच्छों के साथ अच्छा करते हैं और बुरों के साथ काफी ज्यादा बुरा करते हैं। शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। शनि की ढैय्या और साढ़ेसाती से परेशान लोगों को इस दिन शनिदेव की खास पूजा-अर्चना करनी चाहिए।


